बेटा जब नालायकी की हद को पार कर जाता है तब पिता या तो उसकी शादी करवा देता है या पैसे देकर उसके धंधे पानी का इन्तेजाम कर देता है ये सोचकर चलो इसी बहाने ये सुधर जाएगा. अमूमन ऐसा होता है जब बोझ पड़ जाता है तो नालायक भी लायक हो ही जाता है पर इसके कुछ अपवाद भी हैं फिलहाल हम उनकी तरफ नहीं जाते हैं क्यूंकि उस तरफ गए तो हम अपने मूल विषय से भटक जाएंगे.
लालू यादव नाम के एक बहुत ही होनहार पिता जो बिहार की पुण्य धरा पर पैदा हुए और उनके कर्मों की गाथा से पूरा बिहार आज भाव विभोर हो रहा है. इन्होने बिहार को भले ही उन्नति तक न पहुँचाया हो पर अपने निकम्मे साले, चाचा, फूफा और ऐसे ही न जाने कितने अनगिनत रिश्तेदार हैं उनको सरकारी नौकर बना कर सरकार की बंशी बजाने को छोड़ दिया और जिन्हें कुछ नहीं दे पाए उनके लिए इन्होने सरकारी खजाने से बहुत सारी सुविधायें मुहैय्या करवा दी.
इनके कर्म तो इतने ऊंचे हैं के उनका वर्णन कर पाना मुझ जैसे साधारण मनुष्य के लिए तो असंभव है. इनके कर्म कांडों के ऊपर तो ग्रन्थ लिखे जा सकते हैं. इनके कुछ महान कार्य तो इतने महान हैं की बस क्या बताऊँ गैय्या भैंसिया भी शर्मा जाए..इन्होने सबसे ज्यादा बच्चे पैदा करके अपनी खेत के उपजाऊ होने का संकेत बहुत पहले दे दिया था. खेत तो उपजाऊ है पर फसल साला खर पतवार से भी बदतर निकला.
इस शानदार पिता के कर्मों के जैसे ही इसके दो शानदार पुत्र हुए..ये दोनों अपने पिता से भी आगे निकले. पिता ने कम से कम स्नातक तक तो पढ़ाई की इन दोनों ने ये साबित करने के लिए ये लालू के लौंडे हैं..एक ने दसवीं कक्षा नहीं पास किआ और दुसरे ने स्नातक के पहले ही वर्ष में त्यागपत्र दे दिया. मतलब यूँ कहें के पुत्रों ने पिता के नक़्शे कदम पर बचपन से ही चलना शुरू कर दिया था.
बिहार या यूँ कहें पूरे भारतवर्ष के राजनीती के इतिहास में बिहार ही एक ऐसा राज्य है जहाँ का मुख्यमंत्री अशिक्षित हुआ है और ये इन्हें पता था ऐसा महान काम करने वाली इनकी माता जी हैं जिन्होंने पूरे पांच साल तक अंगूठा लगा लगा कर बिहार के लालटेन का तेल सूखा दिया. बेटे भी तो उसी माँ के थे बस इन्होने भी पढने लिखने की जेहमत नहीं उठाई और सीधा मुख्यमंत्री बनने के सपने देखने लगे.
पिता लालू प्रसाद यादव को पता था उनके लड़के कितने लायक हैं उन्हें यदि सामान्य बना कर किसी दफ्तर में चपरासी के लिए भी भेजा जाए तो ये दोनों ही वहां से भगा दिए जाते इसलिए पिता भी अपने बेटों के भविष्य के लिए गहन चिंतन में डूब गए और सही मौके का इन्तेजार करने लगे. ये मौका मिला उन्हें बिहार चुनाव के दौरान और बिहार की भोली भली जनता ने इन पर भरोसा भी कर लिया और इस पिता के मन की मुराद पूरी हो गई.
आज लालू के दोनों निकम्मे लौंडे बिहार की सत्ता में अपने निकम्मेपन को बड़े ही शांति के साथ दिखा रहे हैं. जिनकी औकात चपरासी की नहीं थी आज उनके आगे आई. ए. एस ऑफिसर तक सर झुका रहे हैं. एक बेटा उप मुख्यमंत्री तो दूसरा स्वास्थ्य मंत्री. आज लालू प्रसाद की सारी चिंताएं और सारी समस्याओं का अंत हो गया है और बिहार की जनता की समस्याएं उनके अपने बेवकूफी के वजह से बढ़ गई हैं.
लालू के दोनों लौंडों ने आते ही अपने जलवे दिखने शुरू भी कर दिए हैं और पैसे की उगाही पर अपने आदमियों को लगा दिया है. पहले साल जो उन्होंने अपने चुनाव के दौरान खर्च किआ उसको बसूलेंगे उसके बाद आने वाले सालों में अपना मुनाफा निकालेंगे. आज बिहार का पिता लालू प्रसाद यादव दुनिया का सबसे खुशनसीब पिता है.

